नियम तोड़ने वाले ‘कोविडियट’, कोहनी से हलो करना यानी ‘एल्बो बम्प’ और अकेले पीने वालों के लिए नया शब्द- क्वारेंटीनी

पिछले 20 सालों से ऑक्सफोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी हर तीन महीने में नए शब्द अपनी डिक्शनरी में जोड़ने की घोषणा करता है। अमूमन मार्च-जून-सितंबर और दिसंबर के महीने में नए शब्द जुड़ते हैं। पर साल 2020 कुछ अलग रहा है। बसंत ऋतु के साथ-साथ जुलाई के महीने में भी डिक्शनरी खास शब्दों की घोषणा करता रहा, जो कोविड-19 महामारी के कारण अस्तित्व में आए।

‘कोविड-19’ और ‘सोशल डिस्टेंसिंग’ भी अब अंग्रेजी भाषा का शब्द बनकर डिक्शनरी से जुड़ चुका है। महामारी के कारण कुछ ऐसे शब्द उभरकर आए जिसने शब्दों को रिप्लेस किया है। जैसे ‘एल्बो-बम्प’। इसने हाईफाई की जगह ले ली है। एल्बो बम्प का मतलब है कि सुरक्षित तौर पर कोहनी टकराकर हाय-हलो करना। ऐसे ही एक शब्द प्रचलित हुआ है- ‘जूमबॉम्बिंग’। इसका अर्थ है- वह परिस्थिति जब किसी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान अचानक से कोई अनजान व्यक्ति दिखाई और सुनाई पड़ने लग जाए।

आपने मार्टिनी नाम का कॉकटेल सुना होगा। लेकिन जब कोई सेल्फ क्वारेंटीन की अवस्था अकेले कॉकटेल पी रहा हो तो उसका नाम पड़ गया क्वारेंटीनी। जब कोई महामारी के दौरान सार्वजनिक सुरक्षा के नियमों का उल्लंघन करता पाया जाए तो उसके लिए शब्द बन गया- ‘कोविडियट’। (कोविड+इडियट)। वहीं अगर कोई एंग्जाॅइटी की वजह से ऐसी खबर तलाशता पाया जाए जिससे डिप्रेशन और बढ़ जाए तो ऐसे कृत्य को नाम दिया गया- ‘डूमस्क्रोलिंग’।

कुछ दवाइयों के नाम भी बड़े प्रचलित हो गए हैं। जैसे- हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन और डेक्सामैथासोन। हालांकि, हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन शब्द पहली बार 1951 में सुनने को मिला। लेकिन मलेरिया ये की दवाई 2020 में इतनी प्रचलित हुई कि उसने ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी में जगह बना ली। कम्युनिटी ट्रांसमिशन और कम्युनिटी स्प्रेड भी अंग्रेजी भाषा के साथ-साथ डिक्शनरी का हिस्सा हो गया है। कम्युनिटी ट्रांसमिशन शब्द पहली बार 1959 में इस्तेमाल में आया था।

रोज बोलचाल में इस्तेमाल हो रहे हैं क्वारेंटीन, सेल्फआइसोलेशन जैसे शब्द

ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी के संपादकों का कहना है कि क्वारेंटीन, सेल्फआइसोलेशन जैसे महामारी से संबंधित शब्द पहले से ही थे, लेकिन अब इनका प्रयोग बेहद आम हो गया है। कोरोना काल में पहले की तरह नए वैज्ञानिक या टेक्निकल शब्द सामने नहीं आए हैं। ज्यादातर पुराने अस्पष्ट शब्द, ड्रग या मेडिकल टर्म सामने आए हैं जो रोज की बोल-चाल में शामिल हो गए हैं।



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